preranarathi

koraakagazzz.blogspot.com

Psychotherapist (trainee) http://www.pinterest.com/koraakagazzz https://www.instagram.com/invites/contact/?i=6c51iz6rwf7e&utm_content=lc0e3qf

Grid View
List View
  • preranarathi 4d

    Mirror

    Whenever I see her, I feel the pressence of an innocent child.
    Who doesn't care about the World, and always dares to dream wild.
    Always ready to stand up whenever she falls down.
    Always do the right things without any doubt.
    Let out her feelings through tears without any shame.
    And when I see her in the mirror, I still feel the same.

    - Prerana Rathi
    ©preranarathi

  • preranarathi 1w

    सजा

    आँखो में आँसू, और लब्बो पर मुस्कुराहट,
    पहचान तो है दिल लगाने वालों कि।
    दिल पर जख़्म, और रूह पर सितम,
    सजा तो है मोहब्बत करने वालो कि।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 1w

    क्या रख?

    ऊँची है उड़ान तेरी, अपने हौसलो को बुलंद रख।
    होगी एक दिन ये दुनिया कदमो में तेरे, खुद पर यकी रख।
    राहे होगी नहीं आसान, पर अपने कदमो को मजबूत रख।
    मिलेगी जन्नते भी तुझे, उस खुदा पर एतबार रख।
    जमाना कहे चाहे कुछ भी तुझसे, बस अपनो पर भरोसा रख।
    जो दिल मासूम है तेरा, उस दिल में सिर्फ मोहब्बत रख।
    किसने कहा आसमान को अपनी सीमा बना, अपनी सोच को सीमाहीन रख।
    छूना है अगर उस चाँद को, तो पंख अपने फैला कर रख।
    पूरी कायनात भी होगी तेरी, दिल में अपने तव्वजो रख।
    याद रखेगा ये जमाना तुझे, अपने नाम का परचम लहराने को तैयार रख।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 1w

    धडकने

    तुने हाथ हमारा तब छोड़ा, जब सहारा हमारा वही था,
    तुने साथ हमारा तब छोड़ा, जब हमारे जीने कि वजह वही था,
    अब समझ नहीं आता कि जाएँ कहाँ जनाब,
    अब तो धडकने भी दिल से दूर कही फरमाती है आराम।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 2w

    उम्मीद

    तेरी झूठी उम्मीदों ने हमें खुशीयाँ तो तमाम दी,
    लेकिन जब वो गई, तो हमारी रूह तक ले गई।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 2w

    बर्बाद

    इस बेवफा जमाने से, वफा करने का ईनाम हमे मिला है,
    गैरो पर तो शक था ही, अपनो ने तो हमे बर्बाद किया है।
    ©preranarathi

  • preranarathi 3w

    ........Continued (द्रौपदी)

    खैरात में आऊ ,

    द्रौपदी कहलाऊ ,

    पांचाली बन जाऊ ,

    पांडवों से विवाह रचाऊ ,

    वेहशिया कहाऊ ,

    दासी बन जाऊ ,

    बेइज़्जत हो जाऊ ,

    इज़्जत गवाऊ ,

    चीर हरण सह जाऊ ,

    सबर का घूँट पी जाऊ ,

    और धर्म भी मैं ही बचाऊ | 

    और आज भी कुछ लोग कहते है, महाभारत का युद्ध द्रौपदी ने कराया था ,

    मैं तो सिर्फ जरिया थी, धर्म का डंका तो कृष्णा ने बजाया था | 

    दुर्योधन का लालच था, युधिष्ठिर धर्मराज कहलाया था ,

    कोरवो और पांडवों के बीच युद्ध का मोहरा मुझे कृष्णा ने बनाया था | 

    मित्र ने ही मित्र का जीवन दाँव पर लगा दिया ,

    कृष्णा ने मेरा बलिदान देकर धर्म स्थापित करा लिया | 

    गीता का ज्ञान बाँट दिया युद्ध के मैदान में ,

    धर्म भी सीखा दिया कौरवो के विध्वंस से | 

    पर आज मेरा अस्तित्व क्या है ,

    जो है वो कृष्णा है ,

    गीता का ज्ञान अजर है ,

    पर मेरा योगदान भी अमर है ,

    आखिर द्रौपदी हूँ मैं ,

    मुझ में ही महाभारत हैं | 


                                        - प्रेरणा राठी 
    ©preranarathi

  • preranarathi 3w

    द्रौपदी

    यज्ञ से जन्मी, थी यज्ञसैनी मैं ,

    पिता को चाहत थी पुत्र की ,

    उस ईनाम के साथ खैरात में थी आई मैं | 

    द्रुपद के घर थी जन्मी, द्रौपदी कहलाई मैं ,

    पांडवो से विवाह किया, वेहशिया भी कहाई मैं | 

    मित्रता मिली कृष्ण की, 

    जिसने अर्जुन के दिखाए ख्वाब मुझे, 

    कर्ण को भी ठुकरा दिया कहने पर जिसके मैंने | 

    कुंती ने जबान दे दि , कहा बाँट लो मुझे ,

    धर्म कि रक्षा के लिए चढ़ा दिया बलि मुझे | 

    मेरा मुझ पर ही हक ना रहा, पति ने हक जताया था ,

    जुए में दाँव पर लगा कर, मेरा गौरव मिट्टी में मिलाया था | 

    बालों से घसिटी गई , हाँथ भी उठाया था ,

    दुष्ट दुशासन से फिर वही हाँथ मेरे वस्त्र की ओर बढ़ाया था | 

    अपना आँचल फाड़ कर कृष्ण के जखम पर लगाया था ,

    उसी आँचल से फिर कृष्णा ने मेरा चीर बढ़ाया था | 

    चींखी, चिलाई, इंसाफ के लिए गुहार लगाई ,

    मगर पुरुषों की भरी सभा ने मुझ पर ही थी ऊँगली उठाई | 

    पाँच पांडवो से सम्बंध रखने वाली स्त्री कहलाई ,

    द्रौपदी, पांचाली, साम्रगी होकर भी मैं सिर्फ वेहशिया ही कहाई | 

    पवित्र होकर भी अपवित्र समझी गई मैं ,

    लालच पुरुषों का था, मगर तवाईफ़ समझी गई मैं 

    क्रोध का ज्वाला भड़क उठा, था टुटा सबर मेरा ,

    गांधारी ने जो न रोका होता, भरी सभा को श्राप मेरा के देता स्वाहा | 

    ............... .......To Be Continued in Next Post

  • preranarathi 3w

    जालीम

    चाहते भी थी,
    सपने भी थे।
    जीने कि उमंग भी थी,
    प्यार के रंग भी थे।
    मगर इस दुनिया मे,
    लोग बड़े जालीम भी थे।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 4w

    वादा

    उस चाँद का दीदार करते है,
    हाँ, हम तुझसे आज भी प्यार करते हैं।
    पर ना कहना चलने को साथ तू,
    अब हम साथ किसी और के चलते हैं।
    जो तुने किया, हम वो कर नहीं पाएँगे,
    दिल उसका तोड़ नहीं पाएँगे।
    प्यार न सही, मगर साथ उसका देकर,
    हम अपना वादा जरूर निभाएँगे।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi