prashant_gazal

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  • prashant_gazal 10w

    गीत (वतन)

    वतन से बिछड़कर वतन याद आया l
    गुलों से भरा वो चमन याद आया ll

    अरे यार ये हम कहां आ गये हैं l
    कहां छोड़ अपना जहां आ गये हैं ll
    न बोली, न भाषा, न त्योहार अपने,
    भला किसलिये हम यहां आ गये हैं ll
    पराई ज़मीं , आसमां भी पराया l
    वतन से बिछड़कर................ ll

    नए रास्ते हैं....नई मंजिलें हैं l
    मगर अब कहां वो‌ हसीं महफ़िलें है ll
    बदन‌ है यहां पर , ज़हन है वहां पर,
    सफ़र संग करती कई मुश्किलें हैं ll
    जहाँ सब है अपना , न कोई किराया l
    वतन से बिछड़कर................ ll

    जुदाई की रातें , जुदाई भरे दिन l
    घड़ी चल रही धड़कनें रोज गिन-गिन ll
    क़दम कब रखेंगे वतन की ज़मीं पर,
    हमें उस घड़ी की तमन्ना है पल-छिन ll
    मुकद्दर ने कमबख़्त क्या-क्या दिखाया l
    वतन से बिछड़कर................ ll

    ख़ुदा से दुआ रात-दिन मांगता हूँ l
    सुख़न‌वर वो‌ अपना‌ वतन मांगता हूँ ll
    जहां बाप, मां और भाई बहन हैं ,
    सनम और बेटी-मिलन मांगता हूँ ll
    वही आशियाना, कभी जो बनाया l
    वतन से बिछड़कर................ ll

    वतन से बिछड़कर वतन याद आया l
    गुलों से भरा वो चमन याद आया ll

    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 10w

    बहरे रमल मुरब्बा सालिम
    फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
    2122 2122

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    ग़ज़ल ( हासिल)

    ज़िंदगी हासिल नहीं है l
    मौत भी मंजिल नहीं है ll

    बे-करारी मांगती है.......
    आशिक़ी मुश्किल नहीं है ll

    गम समंदर बन चुका है...
    दूर तक साहिल नहीं है ll

    जानवर से इश्क़ कर लो...
    आदमी क़ाबिल नहीं है ll

    वक़्त बदलेगा हमारा.....
    वक़्त पत्थर-दिल नहीं है ll

    क्यूँ लुटा दें जाहिलों पे...
    इल्म तो फ़ाज़िल नहीं है ll

    इस तरफ तो मुश्किलें हैं...
    क्या उधर हाइल नहीं है ??

    रूह बाक़ी है वतन में.....
    जिस्म में शामिल नहीं है ll

    अब 'ग़ज़ल' किसको सुनाएं...
    वो हसीं महफ़िल नहीं है ll
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 11w

    चामर छंद
    वर्ण - १५
    रगण जगण रगण जगण रगण

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    ईश्वर

    हे शिवाय, विष्णु, ब्रह्म सर्व देवता नमो l
    शारदा, उमा, रमा समस्त शुभ्रता नमो ll
    राम, कृष्ण, सूर्य, चंद्र की अनन्तता नमो l
    श्री गणेश, कार्तिकेय भातृ-भद्रता नमो ll

    सोम, इन्द्र, दक्ष, नाग, सिंधु, कल्कि शाश्वती l
    कालरात्रि, भैरवी, नमामि मोहिनी, सती ll
    रिद्धि, सिद्धि, अत्रि, व्यास, बुद्धिदा सरस्वती l
    कालिका, कपीश,कामदेव, वैष्णवी, रती ll

    चित्रगुप्त, शेषनाग, वीरभद्र, दुर्गमा l
    नंदिनी, वशिष्ठ, ब्रह्मचारिणी, मनोरमा ll
    सिद्धिदात्रि,रूक्मिणी,वसुंधरा, सुधा, यमा l
    वेंकटेश, रेणुका, विभिन्न देव उत्तमा ll

    वायु, वारि, व्योम, भूमि, अग्नि पंच-तत्व में l
    जीव-जन्तु, पर्ण, पुष्प, वृक्ष के घनत्व में ll
    ज्वार-भाट, याम-रात्रि दिव्य चुम्बकत्व में l
    गुप्त आप हैं समस्त सृष्टि के महत्व में ll

    रूप भिन्न ,नाम भिन्न , भिन्न-भिन्न मान्यता l
    जै सनातनी परम्परा सुधर्म , सभ्यता ll
    सर्व देव-देवियां सदा करें सहायता l
    चित्त मध्य हो 'प्रशांत' के सदा प्रसन्नता ll
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 11w

    इश्क़

    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?
    ख़ुदा है , बंदग़ी है, या ख़ता है ll

    तकल्लुफ़ से मुख़ातिब जो नहीं है,
    ज़माने से अलग दुनिया कहीं है l
    गुमाँ है इश्क़ या कोई हक़ीक़त,
    अधूरी या मुक़म्मल है मुहब्बत l
    कोई माँ-बाप को दिल में बसाए,
    कोई औलाद पे जाँ तक लुटाए l
    बहन का हाथ थामे ज़िंदगी भर,
    कलाई से बँधी राखी कहीं पर l
    सुख़न ने रूह को जैसे छुआ है,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    गया बचपन जवानी पास आई,
    फ़िजाओं की रवानी पास आई l
    नज़ारे देखते जब आह निकली ,
    उमड़ते बादलों के बीच बिजली l
    मुसलसल करवटों में शब गुज़ारे,
    सुहाने ख़्वाब, जिनमें चांद-तारे l
    सनम का दिल लुभाती आज़माइश ,
    मुहब्बत के लिए होती नुमाइश l
    निग़ाहें मिल रहीं , दिल खो गया है l
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    अभी तक इश्क़ अच्छा लग रहा था,
    सुहाना और सच्चा लग रहा था l
    मगर अब दर्द क्यूँ होने लगा है ?
    मुहब्बत में मज़ा खोने लगा है l
    जुदाई अब सहन होती नहीं है,
    रहाइश एक पल की भी नहीं है l
    दुआओं में सनम की ख़्वाहिशें हैं ,
    मगर मजबूरियों की आतिशें हैं ll
    ख़याल-ए-हमसफ़र मुश्किल हुआ है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    वफ़ा-ए-यार पाकर मुस्कुराए ,
    हुआ ग़र बेवफ़ा आंसू बहाए l
    मिले या छोड़ जाए रास्ते में ,
    जुदा लम्हात दो, दोनों नशे‌ में l
    मुहब्बत की सही मंजिल कहाँ है ?
    ख़ुशी महबूब की पहले जहाँ है l
    बने ग़र हमसफ़र तो ज़िंदगानी ,
    जुदा हो जाए तो कोई कहानी l
    सनम बस ख़ुश रहे , इतनी दुआ है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    सुकून-ए-दिल मुहब्बत से अगर है,
    दिलों में हाय! नफरत क्यूँ मगर है ?
    बदलते वक़्त में बदले नहीं जो ,
    भले हो‌ ख़ाक पर पिघले नहीं जो l
    शमा से रोज़ परवाना जलेगा ,
    गुल-ए-उलफ़त तो रोज़ाना खिलेगा l
    वही रिश्ता बचेगा इश्क़ जिसमें ,
    ज़वानी में, बुढ़ापे , बचपने में l
    'मुहब्बत' को कहो, कैसा लिखा है ,
    मैं अक़्सर सोचता हूँ, इश्क़ क्या है ?

    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 12w

    2122 2122 212

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    हे गुरू ! शत शत नमन है आपको l
    शिष्य का श्रद्धा-सुमन है आपको ll
    लेखनी परिवार का सौभाग्य है l
    'रिक्त' होने की कला वैराग्य है ll
    नित 'नवल' ऊर्जा जगाई आपने l
    'दीप्ति' दीपक बन जलाई आपने ll
    है 'परम' यह ज्ञान का भण्डार भी l
    व्याकरण की 'माधुरी' रसधार भी ll
    शिल्प , लय, रस, छंद की 'अनिता' यहाँ l
    'सौम्यता' 'रजनी' 'हिया' 'शुचिता' जहाँ ll
    काव्य का नीरद 'सरोजों' से भरा l
    तृप्त 'मानव' का 'विपिन' मन उर्वरा ll
    'शिवि', 'लवी', 'रानी', 'अतुल ', 'आनंद' में l
    शुभ 'विराजित' है 'किशोरी' छंद में ll
    शांतिप्रद 'सम्प्रति', 'तुषारापात' से l
    और 'आकांक्षा'मयी कुछ बात से ll
    शब्द 'गुंजित' हो चले 'संजय' सुनें l
    भाव की 'रेखा' सरल 'अंजलि' चुनें ll
    गीत सुंदर तो 'ग़ज़ल' कोई कहे l
    धार भावों की कहानी में बहे ll
    आप सबसे यह सुखद संसार है l
    आप सबसे लेखनी परिवार है ll

    आप सबसे लेखनी परिवार है ll
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 12w

    2122 2122

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    ग़ज़ल

    दिल हमारा खो गया है l
    क्या तुम्हारा हो गया है ??

    राह-ए-उलफत के सफ़र में...
    जो गया,.. वो तो गया है ll

    अश्क़ आंखों से निकलकर...
    मुस्कुराहट धो गया है ll

    जंग में कोई मरेगा...
    बीज कोई बो गया है ll

    आप तो ऐसे नहीं थे....
    आपको क्या हो गया है ??

    आसमानों से पलटकर...
    आ न पाया जो गया है ll

    महफ़िलें हँसने लगी हैं...
    क्या 'ग़ज़ल' फिर रो गया है ??
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 12w

    मनहरण घनाक्षरी

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    लेखनी

    शोक,हास्य, प्रेम,भक्ति , क्रोध,शान्त,ओज-शक्ति ,
    भिन्न-भिन्न मनोवृत्ति , बोलती है लेखनी ll

    भूतकाल , वर्तमान , संग ही भविष्य-ज्ञान ,
    विधि का लिखा विधान , खोलती है लेखनी ll

    न्यायपालिका सुधार, सरकार के विचार,
    सत्य -झूठ, जीत-हार , तोलती है लेखनी ll

    मन में तरंग भरे , भाव को तुरंग करे ,
    रंग कोरे कागजों में , घोलती है लेखनी ll

    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 13w

    बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब
    मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़
    मफ़ऊलु फ़ाइलातु  मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
     221 2121 1221 212

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    ग़ज़ल (नई-नई)

    क्या-क्या बदल रही है मुहब्बत नई-नई l
    रंगत हुई हसीन..........तबीयत नई-नई ll

    दिल को लुभा रही है निग़ाहों की गुफ्तगू...
    धड़कन बढ़ा गई है....... शरारत नई-नई ll

    कुछ आप, कुछ मिज़ाज जुदा सा है आपका...
    आई है हाथ आपके......... दौलत नई-नई ll

    सरहद अज़ीब है..... मेरे हिंदोस्तान की......
    हर रोज़ मांगती है..........शहादत नई-नई ll

    आदम नकाबपोश कहीं खौफ़ मौत का.....
    आई 'ग़ज़ल' जहां भी..... क़यामत नई-नई ll

    क्या-क्या सिला मिला जो तरक्की हुई बहुत...
    बंजर जमीन और..........इमारत नई-नई ll
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 13w

    बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ
    मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
    1212 1122 1212 22  

    #rachnaprati63 #gunah
    @iamfirebird

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    ग़ज़ल ( गुनाह )

    अमां वो ख़ाक ज़वानी निबाह करते हैं l
    गुनाह जो‌ नहीं करते....गुनाह करते हैं ll

    हरेक बात ज़माने की मानते क्यूँ हो.......
    हज़ार लोग हज़ारों सलाह करते हैं ll

    ज़मीनदार जमीनें हड़प-हड़प करके......
    फ़लक़ के चाँद-सितारों की चाह करते हैं ll

    अदालतों से बरी हो गए सियासतदाँ...
    अजी गुनाह......... कहाँ बे-गुनाह करते हैं ll

    नया है दौर नई और ये रिवायत है........
    किसी से इश्क़, किसी से निकाह करते हैं ll

    गुनाह और यही नेकियाँ मुकद्दर बन...
    कहीं फ़कीर, कहीं बादशाह करते हैं ll

    अभी तो दर्द कई और हैं 'ग़ज़ल' दिल में.....
    अभी से आप कहाँ वाह-वाह करते हैं ll
    ©prashant_gazal

  • prashant_gazal 14w

    २१२२ ११२२ ११२२ २२

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    ग़ज़ल ( अफगान)

    आज के दौर में भगवान कहाँ मिलता है ?
    और इंसान में इंसान कहाँ मिलता है ??

    जख़्म देते हुए हैवान निग़ाहों में हैं.....
    आज अफगान में अफगान कहाँ मिलता है ??

    लोग मासूम जहाँ क़त्ल किए जाते हैं....
    वो ख़तरनाक परिस्तान कहाँ मिलता है ??

    ये सियासत है जिसे झेल रहें हैं हम सब....
    इस कदर मौत का ऐलान कहाँ मिलता है ??

    बेरहम क़त्ल सरेआम किया जाता है......
    बेसबब ज़ंग का मैदान कहाँ मिलता है ??

    पेट से कोई गुनहगार नहीं होता है......
    कातिलों में मगर ईमान कहाँ मिलता है ??

    जन्नतें और 'ग़ज़ल' हूर मिलेंगीं कैसे......?
    मौत के बाद ये सामान कहाँ मिलता है ??

    ©prashant_gazal