prakriti_iipsaa

A fragrance of the feelings... ��SHYAM ��

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  • prakriti_iipsaa 6w



    Your English level is good?

    Not good but it's ok.

    Your English level is good?

    I don't know If you want to know "Hindi" or you know "Hindi", U can follow me.
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 6w

    #2_4_lines
    10/04/2021

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    जिंदगी तुझे जितना बे-रहम होना है तूं हो जा, हम नहीं
    डरते....
    शूलों पे चलके आहों को एहसास कर हँसते हैं, हम नहीं
    रुकते....
    जिंदगी तूं पलटती रह अपने खुरदुरे पन्ने, हम खुद को लिखते
    रहेंगे....
    रोक दे जो मेरी कहानी, दिले-नाजुक कलम ऐसी
    हम नहीं रखते....!!!!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 8w

    विद्यार्थी

    विद्या=ज्ञान, (शिक्षा या अध्ययन से जानना या अर्जित करना)
    अर्थी= प्राप्त करने, ग्रहण करने या जानने की इच्छा रखने वाला अर्थात जिज्ञासु

    विद्या+अर्थी=विद्यार्थी अर्थात ज्ञान के लिए जिज्ञासु

    कुछ मार्गदर्शक कहते हैं.. दिन में 100 पन्ने भी नहीं पढ़े तो क्या पढ़े! अपनी आँखे पूरी तरह गोल...100 पन्ने ये कैसे होगा ,,
    जिज्ञासा के बिना 100 पन्ने पढ़ने से क्या होगा? उसमें से कितना अर्जित कर पायेंगे?
    तो कहते हैं कुछ ना कुछ तो होगा ही, ये क्या बात हुई पूरी किताब पढ़ डाली पर मन तो कहीं और था इसका कोई मतलब निकला?
    नहीं!
    ठीक ऐसे ही हम दूसरे शहरों में सालों पढ़ने के बाद अपने परिणाम को नहीं आक पाते, परिणाम आने का इंतजार करते हैं और परिणाम आता है तो हम कहते हैं कि एक बार और प्रयास करना होगा क्योंकि हमने विते वक्त में मन लगाकर पढ़ाई ही नहीं की थी!

    काक चेष्टा वको ध्यानम् श्वान निद्रा तथैव च...... इस श्लोक की तरह कोई विद्यार्थी दिखता है? हाँ परीक्षा के एक दो दिन पहले हमारी हालत ऐसे ही रहती है!

    दोस्तों के पास में है दिल
    अजीब कयास में है दिल
    पता नहीं और किस किस
    बात में है दिल
    शब्द रूपी अहसासों को
    पन्ने रूपी आखों में समेटे हुए
    किताबें निहार रही हैं
    पर कहाँ उनके पास में है दिल

    कहते हैं ना जहाँ दिल नहीं लगता वहाँ दिमाग काम नहीं करता चाहे लाख कोशिश कर लो!
    तो बिना दिल के या मन के बिना, जिज्ञासा के बिना, अपनी कमियों पर गौर किये बिना सफलता कैसे मिलेगी?

    मेरे प्यारे, छोटे दोस्तों अब कोरोना का बहाना नहीं चलेगा!


    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 8w

    बाल सौंदर्य

    ऐ बहती शीतल मारुत सुन....
    मन उड़ता पंक्षी
    एहसास दीवानी तितली सी
    धड़कन संगीत-मधुर मेरे
    छू कर मुझको तूं भी सपने बुन.....

    खिलखिलाहट से उर-हर्ष भरे
    नयनों में प्रीत-समंदर लहरे
    शब्द सुखद निर्झर से
    ऐ ठहरे अम्बु स्वर भर ले
    पल-पल में कलकल की धुन.....

    अलक निराले अविरल से
    लहराते बलखाते मुखमंडल पे
    कुछ अविरत कुछ अल्हड़ से
    मानो प्रेम परस्पर पल्लवित हुए
    ऐ वारिद तूं भी अपनी अवनि चुन...

    होंठ-पंखुड़ी खुलते शोभित अभिमत ले
    दौड़े मधुकर सुमन छटा समझ कर के
    धरती-अम्बर मंजुल मंजुल
    ऐ तरुवर कोमल किसलय धर ले
    वन- उपवन में अब तूं भी खिल जा रे प्रसून...

    रूप निराली छटा बिखेरे
    चहके घर, आंगन में हो जो मेरे स्वर
    सविता की सुनहरी रश्मि, चंदा की मधु-चांदनी
    सब पलपल मुझमें सिमटे
    माँ तूं ममता भर ले, लोरी कर गुनगुन......

    ---श्याम
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 16w

    #shyam_jee_mirzapuri
    #prakriti_iipsaa
    03/10/2021. 22:17
    ________________________________

    ★कुछ कर...फिर चले जाना★


    जिंदगी मौत से ये दास्ताँ सुनाये
    आ गले लगा ले फिर चले जाना,
    " " " " " "
    घर पुकारे कुछ पल ठहर
    निभा ले फ़र्ज़ रिश्तों के; फिर चले जाना,
    दिल की धड़कन पुकारे
    वतन के लिए कुछ कर; फिर चले जाना,
    राह में फटे कपड़ों में खड़े नन्हे-मुन्हें
    उनकी आँखें करें इशारा कुछ कर; फिर चले जाना,
    ये दुनिया तेरी नहीं अहं लोगों का सताये;
    स्वभिमान कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    गरीब को देख लालच की पट्टी बांधे इंसानियत
    मुस्कुराये, तो गरीबी कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    हवस भरी नज़र जब जिस्म चीर जाये
    दर्द अश्रु बनकर कहे कुछ कर; फिर चले जाना,
    लिख-लिख कर कलम थक जाये
    जो गीत पन्नों पर ना आयें वो कहें कुछ कर; फिर चले जाना,

    जब ख़ूँ नसों में सुलग जाये
    जिंदगी मौत से ये दास्ताँ सुनाये
    आ गले लगा ले फिर चले जाना।
    _________________________________

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    रोज-रोज की आपाधापी में मन अक्सर बहक ही जाता है इसे सुकूँँ की याद कहाँ? हाँ इसे बहलाना पड़ता है...

    कुछ पल ठहर कर
    छत पर टहल कर
    चाँद-तारों पर नज़र कर
    मेघ से मयंक का निकलना छिप-छिप कर
    तितलियों का मडराना फूलों पर
    भौरों का परागण
    पंक्षियों का चहचहाना इतरेतर
    रवि रश्मि की
    अठखेलियां जल पर
    तिनकों के शबनम पर
    स्पर्श मारुत का तन पर
    शीतल अति अहसास कर
    कुछ पल ठहर कर
    निकलना फिर अगली सुबह
    बन के दिवाकर।
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 18w

    17/09/2021. 17:31

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    (१) "झूठी इज़्ज़त, झूठी शान और झूठे लोगों के बीच
    तमाम जिंदगियाँ बर्बाद होती ही रहतीं हैं।"

    (२) "समय के साथ जो सोच ना बदले उसे समझदारी
    नहीं बल्कि मूर्खतापूर्ण ज़िद कहते हैं।"

    (३) "जब किसी परिवार में एक या कुछ व्यक्तियों के
    के विचारों की प्रधानता लम्बे समय तक रहती है
    तो ग्लानि और क्लेश का उत्पन्न होना
    स्वभाविक है।"
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 19w

    सुप्रभात ��
    #2_4_lines
    12/09/2021 07:42am.

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    हम गुफ़्तगू करते नहीं उनसे,
    वो भी हमें भुलाये बैठे हैं...
    हम तो रिश्ते दिल से निभाते हैं,
    अनजान वो खामोशी बनाये बैठे हैं...
    शायद उन्हें हमारी जरूरत नहीं,
    कि आजकल वो यार बहुत बनाये बैठे हैं!
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 19w

    #feelings
    #2_4_lines
    10/09/2021. 11:31 Am.

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    अलग-थलग मैं असभ्य जंगली,
    फिर ये दिल में कैसी बेबसी?
    किसने मुझे याद किया,
    कौन है वो अजनबी?
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 21w

    #2_4_lines
    29/08/2021 17:30

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    कहते हैं लोग जिसे बनना है उसका बन जाये
    खुद वो अपनाता नहीं
    ख़ुद्दार है...
    उन्हें क्या मालूम दिल नाज़ुक है उसका डरता है
    कि यहां गिद्धों का
    बाजार है।

    हुस्न के समंदर में कूदकर सीरत की कश्ती ढूंढते हैं
    कि जिंदगी मँझधार हैं...
    उन्हें क्या मालूम कि कालों के तासीर में कश्ती भी
    और पतवार भी है।
    ©prakriti_iipsaa

  • prakriti_iipsaa 27w

    #2_4_lines
    20/07/2021 14:10

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    खिड़कियां औ' पर्दे बदल गये, हम ढूंढते चिलमन रहे!
    लोग सौदे से इश्क करने लगे, इश्क में मरने वाले कितने रहे!!
    ©prakriti_iipsaa