prakhar_sony

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Reposts
  • prakhar_sony 16w

    (2.02.2022)

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    छिप नहीं सकते किरदार इस इश्क के।
    सब तरफ़ हैं तलबगार इस इश्क के।।
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    तुम लगे हो बनाने हदें इश्क की।
    दोस्त बौने है मेयार इस इश्क के।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 26w

    19.11.2021
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    अज़ाँ - इस के बाद
    शब-ओ-रोज़ - रात दिन

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    लोग कहते हैं रिश्ता जहाँ से रखें।
    और उम्मीद क्या फिर अज़ाँ से रखें।।
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    रंग बदले शबो-रोज़ जो आसमाँ।
    फिर नज़र आसमाँ पे कहाँ से रखें।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 27w

    (15.11.2021)

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    कागज़ी थे रंग खुश्बू भी नहीं थी।
    इश्क की महफिल में वो ख़ूबी नहीं थी।।
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    सोचते थे हम जिसे अक्सर मुकम्मल।
    वो हक़ीक़त में ग़ज़ल पूरी नहीं थी।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 44w

    (17.07.2021)
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    जुम्बिश - चहल-पहल, कँपन
    सहरा - रेगिस्तान
    सदा - आवाज़
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    ##my_burnt_diary

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    मिटा दी है फ़िहरिस्त सब ख़्वाहिशों की।
    बू आने लगी थी हमें साजिशों की।।
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    अचानक रिहाई का ये फैसला क्यों।
    लगी ही थी आदत अभी बंदिशों की।।
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    सभी की छतों पे है इक जैसा रौशन।
    ख़बर चाँद को क्या दिली जुम्बिशों की।।
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    है सहराओ के दरमियाँ घर हमारा।
    सदा फोन पे सुनते हैं बारिशों की।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 45w

    सभी हाज़िर थे बे-मतलब तमाशे में।
    न थे शामिल म़गर करतब तमाशे में।।
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    अभी लम्बा चलेगा ये तमाशा कुछ।
    कड़ा किरदार है जब तक तमाशे में।।
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    कभी देखा न जिन्हें हमने सड़को पे।
    लगे हैं दिखने वो साहब तमाशे में।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 54w

    (7.05.2021)
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    मयस्सर - नसीब होना
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    शेर

    रंग किस्मत में उजालों के है सारे।
    रात को कब हैं मयस्सर रंग सारे।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 55w

    (3.05.2021)
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    आब - पानी
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    हम भी चलकर ये तमाशा देखते हैं।
    आब में कैसे वो प्यासा देखते हैं।।
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    आप ही ने दी हवा इस बात को फिर।
    आप क्यूँ कोई किनारा देखते हैं।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 55w

    मुझे इस तरह सारे किस्से दिखाए।
    कि मेरी ही ख़ामी के हिस्से दिखाए।।
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    सभी पेड़ जंगल के कटने लगे हैं।
    ज़माने को कागज़ ये अच्छे दिखाए।।
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    दिखाए हमें सिर्फ़ दरिया के रस्ते।
    सड़क के कहाँ हमको रस्ते दिखाए।।
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    हक़ीक़त में वो लोग शैतान थे बस।
    मगर टी.वी ने सब फ़रिश्ते दिखाए।।
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    ज़माना है हद से गुज़रने का समझो।
    किताबें न रक्खो जो पर्दे दिखाए।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 55w

    (01.05.2021)
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    मुंसिफ़ - न्यायाधीश/ judge
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    चाँद सूरज आसमाँ तारे सही हैं।
    ख़्याल ख़्वाहिश ख़्वाब तुम्हारे सही हैं।।
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    सच है मुंसिफ़ के हवाले अब हमारा।
    झूठ तेरे सारे के सारे सही हैं।।
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    रौशनी की तुम नुमाइश में लगे हो।
    असलियत में दोस्त अँधियारे सही हैं।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 55w

    (01.05.2021)
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    दरिया - नदी
    जानिब - तरफ/ओर
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    शेर

    जो समंदर की तलाशी से फ़ुर्सत तुम्हे हो।
    गौर फिर दरिया की जानिब करो तुम शायद।।
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    ©prakhar_sony