prakhar_kushwaha_dear

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Tough writer, Different thinker VSSD clg Kanpur insta id- prakhar_kushwaha_dear

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  • prakhar_kushwaha_dear 3w



    वैसे तो किरदार में मिज़ाज़ बहुत हैं,
    पर ना जाने क्यूं आज बहुत हैं।

    कोई एक मजनू न एक बादशाह हुआ,
    दिल कहता है 'डिअर' ताज बहुत हैं।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 3w

    ग़ज़ल

    ना अपना कहे कोई पराया ना समझे,
    मैं क्या हूँ किसीका अबतक ना समझे।

    तुम तो हमेशा से ताने हो देते,
    इंसां इशारे भी कैसे ना समझे।

    समझी नहीं जो बुजुर्गों की बातें,
    बच्चे रहोगे जबतक ना समझे।

    हमारा है क्या हम सुख़नवर हुए,
    क्या है तुम्हारा जो आखर ना समझे।

    ना पागल कहे कोई दीवाना ना समझे,
    आशिक़ हूँ भई कोई मुझको भी समझे।

    उनका मुकद्दर नुकीले हुए,
    कैसी चुभन है कांटें ना समझे।

    कैसा वो मंज़र फ़िर होगा 'डिअर',
    सूखी ज़मीं हो बादल ना समझे।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 4w



    कभी गुज़रे जो फिर तेरी गलियों से हम,
    फिर वही पर्दा रखना फिर झांकना तुम।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 5w

    ग़ज़ल

    अब और नहीं सहा जाता मुझसे,
    कुछ और नहीं कहा जाता मुझसे,

    तू अकेला नहीं दगा देने वाला,
    शख़्स कोई नहीं निभाता मुझसे।

    ग़ज़ल तो मैं भी हसीन लिखता,
    मात्रा भार नहीं उठ पाता मुझसे।

    जो पढ़ रहा ग़र दीवाना नहीं,
    क्यों नहीं छोड़ बढ़ जाता मुझसे।

    मैं अंगारों पे चल दिखा सकता हूँ,
    लहू नज़र नहीं मिलाता मुझसे।

    है ही नहीं कोई संगदिल 'डिअर',
    होता तो कोई बताता मुझसे।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 5w

    दोस्तों लिखने के इस तरीके को क्या कहेंगे,,?
    क्या आप इसे समझ पाए ठीक से..?

    Pta nhi kya likh diya..���� plz cmnt..����

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    ऐसे तो न थे तुम जैसे हो गए हो,
    मतलब ये कहने का कि तुम मुझमें खो गए हो।

    पहले आशिक़ थे अब पागल हो,
    समझने का मतलब क्या से क्या हो गए हो।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 6w

    फ़ज़ल- कृपा, मेहरबानी, blessings

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    अस'आर पढ़े ख़ूब एक ग़ज़ल के लिए,
    फिर भी न लफ्ज़ आए फ़ज़ल के लिए।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 6w



    कहता नहीं अब ज़माने से कुछ,
    मैं अपना ही सर खुद पटक मारता हूँ।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 6w



    मरे नहीं मरने के वादों पर,
    शक़ होने लगा था,
    इश्क़ के इरादों पर...

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 6w



    कुछ तो दुआओं का असर होगा,
    इक भी कहीं ग़र 'डिअर' होगा।

    पल भर को जो मेरा हाफ़िज़ बने,
    माथा मेरा उसका दर होगा।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'

  • prakhar_kushwaha_dear 6w



    ऐसे तो कोई बात भी नहीं है,
    खुशबू नहीं है, बरसात भी नहीं है।

    तकलीफ़ होती है उन्हें याद करके,
    और भूल जाने की औक़ात भी नहीं है।

    प्रखर कुशवाहा 'Dear'