prakashinidivya

"ख़यालों की कीड़ा"

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  • prakashinidivya 1w

    16/1/2022
    11:22pm

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    शीत लहरों हवाएं की शमा में
    रात बीत रही खामोशी सभा में
    परेशान है मनुष्य आज की वबा में
    मुठभेड़ बहुत है मन की रज़ा में

    उदास है वो बरसों से
    मगर रोया भी नही
    कैसा कम्बख़त नया सत्र आ गया
    जो बिल्कुल भी बदला नहीं

    दिन ब दिन हालत न जाने
    क्यूं बिगड़ते ही जा रहे
    चक्रव्यूह सा मंज़र है लगातार
    महामारियों से उलझते ही जा रहे


    निगाहों को अब ख्वाबों की पतंग खींच रहे
    टूटा हुआ वृक्ष दुआओं में पल रहे
    बुलन्द परवान चढ़ कर जो गर्व से खड़े
    वो शख़्स सफलता की नई बीज बो रहे
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 3w

    Happy २०२२
    ४/१/२०२२
    you can't go back and change the beginning ,but you can Start where you are and change the ending

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    ✏️

    उस ख़्वाब में जिएंगे
    जिस ख़्वाब के लिए मरा करते थे ।।
    बरबाद होने से डरता कौन है
    अब तो सिर्फ़ ख्वाहिशों के बहाव में उड़ेंगे !!
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 5w

    #500 post
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    बड़ा बेटा ।।

    रिश्तों और जिम्मेदारियों से
    इस कदर झूल गया हूं...
    घर का बड़ा बेटा हूं न,
    इसलिए सबकुछ पहले ही सीख गया हूं ।।

    उम्मीदों के समन्दर ने मुझे
    सबसे पहले अपने पास बुलाया था,
    अपनत्व की डोर और ममत्व के चक्रव्यूह में
    मुझे कच्ची उमर में ही फंसाया था ।।

    घर की तमाम बातें
    आजकल मुझसे सलाह मांगती है
    सुझबुझकर सलाह दूं
    बावजूद उसके हिसाब मांगती है ।।

    हिफाजत करना मेरा परम
    कर्तव्य बन चुका है
    ख़ुद को युधिष्ठिर समझ सकूं
    ऐसा मेरा वर्चस्व बन चुका है ।।

    कश्मकश के मंजरों को
    दिल में दबा लेता हूं
    मां जब भी पूछे कैसा है बेटा
    बेझिझक मुस्कुरा देता हूं ।।
    ©प्रकाशिनी दिव्य
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 7w

    मेरी भाषा !!!

    प्रत्युत्तर हो जाते है जुबां भी मेरे लड़खड़ाते है
    मेरी भाषा से दूर जाऊं दिल भी मेरे घबराते है !!

    व्याकरण का अथाह सागर कभी सही से समझ नहीं आए, दोहा , रोला छंद ने तो मुझे , दसवीं में ही सबक सिखाए !!

    हिन्दी साहित्य " भाषाओं के संगम " के सुगम मेले है
    उर्दू , संस्कृत , फारसी सभी भाषाओं के सच्चे सहेले है !! "

    भावनाओं में रहकर हिंदी दूर से ही मुस्कुराती है ।
    पवित्रता की सच्ची देवी " मां " सा कर्तव्य निभाती है !!

    अभिमान है मेरे कलम को " हिंदी " उसकी आवाज़ है
    सिर्फ़ भाषा ही नहीं , हर हिंदुस्तानी के सर की ताज है !!
    ©प्रकाशिनी दिव्य "
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 7w

    संगीत !!!

    आज कुछ अनकहे जज़्बात सुनाऊंगी ....
    खुद के जुबानी मै किसी के अल्फ़ाज़ सुनाऊंगी !!!

    एक बवंडर जीवन का जवाब नहीं होता ....
    संगीत के बिना जीवन जीना शायद आसान नहीं होता !!!!

    सुर ताल और सरगम का ज्ञान बख़ूबी हो जिसमें...
    वहीं शख्स तो संगीत का भगवान होता है !!!

    वो रोता है वो मुस्कुराता है जज़्बात भी बख़ूबी निचोड़ता है ...
    संगीतकार नायक होते हुए भी पर्दे के पिछे होता है !!!!

    उनकी तारीफ़ हम साधारण मनुष्य क्या कर पाएंगे ...
    हर किसी के अकेलेपन का सहारा भी तो संगीत होता है !!!
    ©प्रकाशिनी दिव्य

  • prakashinidivya 7w

    बाल सुलभ और सुंदर मुखड़े से सारे जगत को भाया है । ।
    श्यामल मुखड़े वाला "कान्हा" हृदय में सबके छाया है । ।

    मस्त मग्न और शरारतों का किस्सों में रमते जाओगे ।
    जय श्री कृष्ण कहो पूरे दिन बस मूस्कुराओगे ।।

    सुंदर सुशील स्त्री बनकर द्वारे में पूतना आई थी। ।
    छवि कृष्ण का देख वो भी घबराई थी । ।

    तृणावर्त को बवंडर बनाकर कंस ने इस बार भेज दिया था
    गला दबाकर ,श्री कृष्ण ने उसका भी वध किया था

    गाय के रूप धारण कर वत्सासुर भी आया था
    कृष्ण की लीला से वो भी न बच पाया था

    बकासुर और अघासूर भी आतंक मचाने आए थे
    बगुले और विशाल अजगर का अवतार वे अजमाए थे।।
    © प्रकाशिनी दिव्य

  • prakashinidivya 7w

    समझ नही आता मन की जंजीरों को
    बेवजह आवाज़ क्यूं करती है
    घुटकर रोती है
    या अपने ख्वाहिशों को जीतने के लिए लड़ती है।
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 8w

    मासूम सवालों ने उसके ,हर तरफ़ से मुझे झंझोड़ दिए है ।।
    क्या बताऊं यारों उसकी इच्छाओं ने तो मेरे सारे सेविंग्स तोड़ दिए है ।।
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 8w

    ठंड की दिनों में विटामिन D तो चाहिए न !!!
    अब line's पढ़ ही लिए तो मुस्कुराइए न!!

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    अंगारों में पांव रखने की आदत बना ली है, तो सूरज की धूप भी मीठी लगी हैं।
    बड़ी बड़ी बातें करने लगी हूं मम्मी कहती है क्यूं री आजकल किस शायर को पढ़ने लगी है !!
    ©prakashinidivya

  • prakashinidivya 8w

    आंसूओं ने दूरियां बना ली जनाब,लगता है हम मशहूर हो रहे !!!
    क्या खटक रहा है सीने में कुछ दिनों से, लगता है हम मगरूर हो रहे !!
    ©prakashinidivya