• sourabh_sharma 94w

    वीर जवान

    बेड़ियाँ जकड़ी थी ,
    लहू लुहान था बदन ,

    सांसे थमने लगी थी ,
    चीख रहा था मन ,

    होली बारूद की थी ,
    दिवाली बम गोलों की .

    दोस्ती बन्दुक से थी ,
    रिस्तेदारी तिरंगे की ,

    सरहद अपना घर था ,
    हर जवान का था भवन,

    ऐ वतन , ऐ वतन,
    विदाई पे है, अब ये जीवन।।
    ©sourabh_sharma