• mithyasach 116w

    ख्वाब

    ख्वाबों के खजाने से,था मिला इक ख्वाब,
    प्यार उसको मैंने,किया बेहिसाब ।
    तराशा उस ख्वाब को,सजाया बेशुमार,
    दिल में रख के पाला,
    रोज़ मिलता था दीदार।
    रफ्तार ज़िन्दगी की,और
    वक्त की तेज़धार,
    हौंसले परखने को,खड़े थे सब तैयार,
    जूझने का जज़्बा न होता तो,सच कहूं-
    बिखर जाता सब कुछ,
    टूट जाता मेरा ख्वाब!!
    ©mithyasach