• prashant_gazal 19w

    बहरे रमल मुरब्बा सालिम
    फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
    2122 2122

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    ग़ज़ल ( हासिल)

    ज़िंदगी हासिल नहीं है l
    मौत भी मंजिल नहीं है ll

    दिल जुनूनी मांगती है.......
    आशिक़ी मुश्किल नहीं है ll

    गम समंदर बन चुका है...
    दूर तक साहिल नहीं है ll

    जानवर से इश्क़ कर लो...
    आदमी क़ाबिल नहीं है ll

    वक़्त बदलेगा हमारा.....
    वक़्त पत्थर-दिल नहीं है ll

    क्यूँ लुटा दें जाहिलों पे...
    इल्म तो फ़ाज़िल नहीं है ll

    इस तरफ तो मुश्किलें हैं...
    क्या उधर हाइल नहीं है ??

    रूह बाक़ी है वतन में.....
    जिस्म में शामिल नहीं है ll

    अब 'ग़ज़ल' किसको सुनाएं...
    वो हसीं महफ़िल नहीं है ll
    ©prashant_gazal