• man_ki_pati 8w

    "मन कि पाती"....

    बहुत जी लिए ज़िन्दगी...
    अब किसी कि चाहत भी नहीं...

    अब तो बात करते हुए भी सहम जाते हैं...
    कि हमारे कुछ कहने से किसी को आहत तो नहीं......

    ये परवाह करते करते आ गए इस मुकाम पर..
    जहां से वापसी कि कोई उम्मीद भी नहीं...

    अब तो ज़िन्दगी भी एसी लगने लगी हैं ..
    मानो इसको अब हमारी जरुरत ही नहीं..

    ना जाने इस संसार में कितने ही बेवजह जीते हैं..
    कही हम भी तो उनमे से नहीं..

    एसा हम ही नहीं..
    ना जाने कितने सोचते हैं अपने बारे में...

    कुछ बयान कर जाते हैं..अपने मन कि पाती को..
    और कुछ उसे अपने साथ ही लिए दुनिया से कूच कर जाते हैं..

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    "मन कि पाती"....

    ©man_ki_pati