• ajaykrsingh123 12w

    साधारण

    बिल्कुल सादा लिखता हूँ,
    जब दिल में बात नहीं होती,
    तब कुछ ज्यादा लिखता हूँ।

    अपना इरादा लिखता हूँ,
    मसालों से परहेज नही है,
    फिर भी सादा लिखता हूँ।

    सच ही हर बार लिखता हूँ,
    उससे मेरा कोई वादा नही,
    पर मैं वही करार लिखता हूँ।

    जितना हो सके कद्र लिखता हूँ,
    शब्दों को भी नग्न नहीं छोड़ता,
    साधारण लेकिन भद्र लिखता हूँ।

    अहम की डोर नही लिखता हूँ
    चौंका कर तुम्हें चकमा देता हो ,
    मैं कभी वो शोर नही लिखता हूँ।
    ©ajaykrsingh123