• amateur_skm 31w

    �� पिता ��
    पितृ दिवस की शुभकामनाएं


    मां कहती है कि मैं आप पर
    एक कविता लिखूं
    लेकिन आप के लिए
    कभी नहीं बुन पाऊंगा शब्दों का इंद्रजाल
    क्यूंकि कठोर हृदय पर स्याही से
    कुछ नही लिखा जा सकता

    पिता और हमने ने हर बार बनाई
    एक सख्ती की दीवार अपने बीच
    उस दीवार को लांघ कर
    ना कभी आप कह पाए
    ना मैं कभी कह पाया
    कि हां हमें अथाह प्रेम हैं

    कभी कभी आपके डांट से
    ऐसा लगा कि आपके जैसा कठोर कोई नहीं
    फिर समझ आया कि डांट जरूरी होते है
    मां ने बताया था कि
    कठोर हृदय मोम जैसा होता है
    जोकि छिप कर हमारे आंसू से पिघल जाता है

    पिता आप कुछ ना करना
    सिर्फ़ एक काम करना
    आप खिलखिला कर हंसना
    मुरझाए फूल भी मुस्कायेंगे
    तितली(मां/ईश्वर)भी मुस्काएगी
    ईश्वर के बगल में हम भी मुस्कायेंगे

    (��जिन्होंने असमय अपने पिता को खो दिया,उनके पिता होते है ईश्वर के प्रिय पुष्प। ईश्वर चाहता है कि वो प्रिय पुष्प उसके बागीचे में ही रहे जिसकी खुश्बू हर समय घर आंगन तक महकती रहती है)

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    पिता पेड़ के पत्ते जैसे होते हैं
    वो छांव तो देते है
    लेकिन उनके हिस्से में सिर्फ़ धूप आयी
    मां होती है एक सोनचिरैया जो
    जीवन भर बनाती रहती है पेड़ पर घोंसला
    हम उस घोंसले में छाँव का आनंद उठाते रहते हैं

    ~सौरभ