• parle_g 19w

    @gunjit_jain @iamfirebird @anas_saifi @vipin_bahar @prashant_gazal @lafze_aatish @ajit___ @dipps_

    दिल को दिल बना दे साकी ❤️

    Read More

    ग़ज़ल (साकी)

    मीटर - 2122 2122 2212 222

    डरते क्यूं हो जाम कोई आखिर पिला दे साकी
    जंग अपनो से पड़ी है, कुछ हौंसला दे साकी

    कल मलाल-ए-यार आये, तो जहर पिला मुझको
    आग लगने से भला है, दीपक बुझा दे साकी

    इक़ मुहासिब पूछता है दिल की तलाफ़ी हर रोज
    कम्बख्त कोई तो तर्क-ए-दिल-ओ-फ़ना दे साकी

    आज इल्ज़ाम-ए-मुहब्बत आने को है पलभर में
    आज तो इस दाग़ को इक़ अच्छी बला दे साकी

    उन चिरागों से हवा की बातें नही करता घर
    जिन चिरागों को हवा अंदर तक जला दे साकी

    आजमाइश,ज़र्फ़ का सर फोड़े तो अच्छा होगा
    दिल-फ़िगारों को जरा सी हरकत दिला दे साकी

    मौत अपनी है, कभी भी दिल से लगा लेंगे हम
    बस करो, प्यालें में इक़ दो पत्थर मिला दे साकी

    सोचती हूँ की ग़ज़ल का मातम कहां तक है साथ
    आज, छोटा ही सही पर इक घर बना दे साकी
    ©parle_g