• naveensanadhya99 10w

    चाणक्य नीति

    निस्पृहो नाधिकारी स्यान्न कामी भण्डनप्रिया। नो विदग्धः प्रियं ब्रूयात् स्पष्ट वक्ता न वञ्चकः॥

    अर्थात् (Meaning)

    विरक्त व्यक्ति किसी विषय का अधिकारी नहीं होता, जो व्यक्ति कामी नहीं होता, उसे बनाव - शृंगार की आवश्यकता नहीं होती । विद्वान व्यक्ति प्रिय नहीं बोलता तथा स्पष्ट बोलनेवाला ठग नहीं होता ।

    - नवीन कुमार सनाढ्य
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