• hindikavita 49w

    अश्कों में बिखर जाए उसे शायर नहीं कहते
    जो इश्क में मर जाए उसे कायर नहीं कहते
    करते हैं सितम खुदपे जो उनकी याद में
    क्यूं उनको जहां वाले सितमगर नहीं कहते

    दर्दे बयां है करता हर एक काफिया उनका
    पर अपने महबूब को वो कभी काफ़िर नहीं कहते
    और टूटते है दिल भी उनके कराह कर
    इजहारे मोहब्बत जो खुलकर नहीं कहते

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