• deovrat 7w

    असमंजस

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    वो भी क्या दिन थे कि
    जब हरेक बात पे हाँ थी।

    ख़ुलूस-ओ-वक़ार की,
    इफ़रात-ओ-इन्तेहा थी।।

    आज वो तिरछी नज़र है
    फ़क़त मयस्सर हमको।

    ग़र ये हक़ीक़त है 'अयन'
    तब वो सदाक़त क्या थी।।
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    ©deovrat "अयन" 21.10.2021

    इफ़रात=बहुतायत। मयस्सर=उपलबद्धता
    हक़ीक़त=यथार्थ। सदाक़त=सच्चाई