• monikakapur 69w

    आज़ादी

    दो दिन तिरंगा फहरा लिया
    गीत देश प्रेम का गा लिया
    क्या यही है आज़ादी फ़ख़त
    या दिल को बस फुसला लिया
    हैं वही पानी, मिट्टी और हवा
    फिर भी क्यूँ एक समान नहीं
    इन 13२ करोड़ भारतीयों का
    क्यूँ मज़हब हिंदुस्तान नहीं

    जिस दिन मंदिर जाने की गली
    मस्जिद की और भी जाएगी
    जब हर रात दिवाली होगी और
    हर दिन ईद मनायी जाएगी
    जब हरे और भगवे के बीच
    की जंग फ़ना हो जाएगी
    सच कहती हूँ हाँ उस दिन
    आज़ादी गीत सुनाएगी

    जब अपनी बात सुनाने को
    हिंसा का राह हम छोड़ेंगे
    जब होंगे आंदोलन शांति से
    कुछ तोड़ेंगे ना फोड़ेंगे
    जब बिना आवाज़ उठाए भी
    हर बात सुनाई जाएगी
    सच कहती हूँ हाँ उस दिन
    आज़ादी गीत सुनाएगी

    जिस दिन देश की बेटियाँ
    सिर उठा के बाहर आएँगी
    जब उनकी लज्जा, चरित्र पर
    ना उँगलियाँ उठायी जाएँगी
    जब जन्म लेने से ही पहले
    साँसें ना तोड़ी जाएँगी
    जब ना कोई निर्भय की
    लाज छीनी जाएगी
    सच कहती हूँ हाँ उस दिन
    आज़ादी गीत सुनाएगी


    जब टूट जाएँगी दीवारें
    खिड़कियाँ खुल जाएँगी
    जब जातिवाद के नाम पे
    चीजें ना बाँटी जाएँगी
    जब भारत का नाम सुनते ही
    दुनिया अपना शीश झुकाएगी
    सच कहती हूँ हाँ उस दिन
    आज़ादी गीत सुनाएगी
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