• shraddha_shuklaa 63w

    खामोश

    खामोश हूं ये बस वक्त की दुश्वारिया है,
    अहम् नहीं मेरा..... ......

    टूट कर जो रिश्तो के आंगन में बह गया ,
    वो वहम है मेरा........

    पलटो कभी गुजरे पल के पन्ने तुम,
    हर जगह साथ होगा मेरा.......

    शिद्दत से हर रिश्ता निभाने पर भी,
    आज हाथ खाली मेरा.....


    ©shraddha_shuklaa"अनुरक्ति"