• neha_ek_leher 35w

    है ढल रहा सूरज अपनी तपन छोड़कर
    चाँद भी निकल रहा शीतल चादर ओढ़कर
    तारों से सजा है नीला अम्बर आज फिर
    प्रतीत होता है मिली
    राह-ए-मंजिल किसी राही को कहीं।

    ©neha_ek_leher