• abhi_mishra_ 63w

    सहर - सवेरा
    निजात - मुक्त
    स्याह - काला, Dark
    हयात - ज़िंदगी


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    काश कि तेरे शहर से, मेरी बात हो पाती,
    बिताता कुछ वक़्त तो मुलाक़ात हो पाती।

    गुज़रता फ़िर गलियों से, राहों से, चौराहों से,
    ढूँढता मैं वो सहर, कि जिसकी रात हो पाती।

    पूछता मैं हाल तेरा हर पत्ते से, हर डाली से,
    शामें मेरी फ़िर फिक्र से, निजात हो पाती।

    तू रूठती तो डूबता, शहर स्याह अंधेरों में,
    तू मुस्कुराती तब ख़ुशनुमा हयात हो पाती।

    सुनता तेरा शहर जब, फ़िर किस्सा तेरा मेरा,
    वो पोंछता फ़िर आँसू, तब बरसात हो पाती।

    ©abhi_mishra_