• raaj_kalam_ka 9w

    #osr������(१७/११/२१)✍️

    आजकल की व्यस्त जिंदगी
    और रिश्तो से बढ़ती दूरी

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    बिखरते रिश्ते

    जलाई नहीं रिश्तो की किताब,
    ताक पे उसे सजाया है
    जमी हुई धूल को ना कभी हटाया है।

    इंतजार उस हवा के झोंके का,
    जो पन्ने बिखेर जाए
    समेटते पन्नों में भूले से ही सही
    कोई अपना याद आ जाए
    दिल कर जाए पूछने का कि
    बता ए मेरे रिश्ते
    तुम जिंदा हो, के मर गए।।
    ©raaj_kalam_ka