• deepajoshidhawan 11w

    #rachanaprati106

    @jigna_a बहुत दिनों बाद वापस लौट रहे हैं हम।
    आपका विषय शायद इसका कारण है।
    ये ख़्वाहिश अपने लिए नहीं, सब उन माता पिता के लिए
    है जिनके बच्चे पढ़ लिख कर विदेश चले गए और वहीं के
    होकर रह गए। उन घरों में विदेश से भेजे गए पैसों से सब
    सुविधाएं थीं लेकिन माँ बाप की आँखों की चमक कहीं गायब
    थी।
    वो पल दो पल को तब दिखी जब वो अपने मोबाइल पर अपने
    उन नाती पोतों की तस्वीरें दिख रहे थे, जिनको उन्होंने कभी
    देखा ही नहीं।
    मेरी ख़्वाहिश यही है कि लोग इस बात को समझें कि पैसे सिर्फ
    सुविधाएं दी सकते हैं, खुशियाँ नहीं।
    जिन्होंने इस लायक बनाया कि देश विदेश में नाम हो सके,
    उनके पास आने का वक़्त निकालना ही होगा।

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    मन परिंदा सोचता है दूर गगन उड़ जाने को
    ख़्वाहिशों की दिखायी राह पर मुड़ जाने को

    ज़िम्मेदारियाँ आस लगाए बैठी हैं इन्तज़ार में
    इस बार परिंदा लाएगा खुशियाँ नयी बहार में

    रे मन चाहे जितनी ऊँची उड़ान तू भर आएगा
    थक कर अपना घोंसला याद बहुत ही आएगा

    सात समुंदर पार भले सपने नए सजाना तुम
    बाट जोहते पथराई ऑंखें ना भूल जाना तुम
    ©deepajoshidhawan