• ajaykrsingh123 12w

    सरकारी कलाबाज़ी

    चौड़ी सड़कों पर चौड़ा चलते,
    तंग गलियों की फिक्र कहाँ,
    वो तो रसपान को आतुर फिरते,
    रंग कलियों की जिक्र जहाँ।

    उदास गाँव के चमकीले सपने,
    सोंधी खुशबू और ताज़ी हवा,
    मौसमी सड़क पर ज़रा फिसले,
    तो फिर शहर से आती है दवा।

    क्या हुआ जो बरसाती पानी,
    उस घर की चौखट लाँघ गया,
    हम देंगे तुमको अनुदान सभी,
    यह कहकर मत वो मांग गया।

    भोली भाली कतई नही है,
    ये जनता सबकुछ जानती है,
    यदि ना डूबे पानी में आधा,
    सब ठीक है ऐसा मानती है।

    एक उम्र बितानी है सबको,
    मिलेगी धूप कभी तो छाँव कभी,
    तुमको सच में सबकुछ देंगे,
    आश्वासन दिया ना अभी-अभी।

    आज साइकल कल होगी गाड़ी,
    बेच दो अपनी सब खेती बाड़ी,
    तुम तन के चलना सूट पहनकर,
    और अम्मा को देना महंगी साड़ी।

    बहुत समय है बीता लेकिन,
    फिर क्यों सब कुछ वैसा है,
    वो जो ठाठ झाड़ रहे है नेता,
    क्या यह उनका ही पैसा है।

    चार किलो अनाज पर नाज़ करते,
    कौड़ी की मदद व लाखों का इश्तहार,
    तरक्की की है योजना ध्यान से देखो,
    तारीफ के क़ाबिल है देश की सरकार।