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    यास-भय,निराशा

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    संकट

    एक संकट टला नहीं
    दूजा दस्तक दे गया

    एक का मरहम मिला नहीं
    दूजा जख्म देने आ गया

    नहीं उभरे थे अभी हम
    कोरोना के उन जख्मों से
    ताऊते ने आकर पुनः तबाह कर दिया।

    जैसे-तैसे खुद को सम्भाल कर
    खड़े हो रहे थे हम भारतवासी
    यास ने आकर चहुं ओर
    पुनः यास बिखरा दिया ।

    यास की इस गति का भी उपाय निकालेंगे
    हम हिन्दुस्तानी यूहीं हार नहीं मानेंगे

    है लडना सीखा जन्म से हमने
    कभी परिस्थिति से तो कभी गम से

    नहीं थके आज तक ना कल ही थकेंगे
    अपनी जीवन की नैया पार हम करेंगे ।

    एक दूजे की मदद का हाथ बन
    हम सब हर संकट पार करेंगे।

    ©neha_ek_leher