• bal_ram_pandey 63w

    रिश्तों के दीवारों में दरार है
    फकत पैसे से लोगों को प्यार है

    सच की हाथों में फूलों के गुच्छे
    झूठ के हाथों में तलवार है

    गांव के लोगों की उम्र लंबी
    शहर में हर शख़्स बीमार है

    क्यों करें खुशामद बूतों की
    ख़ुदा मेरा बड़ा खता गफ्फार है

    रिक्शे वाले से पूछा हाले दिल
    कहा उसने मेरा चेहरा अखबार है

    तबीयत देश की क्यों नाशाद है
    यूं तो बदलती रही सरकार है

    ©bal_ram_pandey