• imgarima 17w

    सफर...!

    सफर में कोई साथी मिला,
    जिसके साथ सफर का पता न चला,
    कुछ कहा नहीं मगर,
    एक सुकून था,
    ये सफर मेरा तन्हा नहीं कटा...!!

    पहले रहती थी उदासी थोड़ी,
    फिर चेहरे पर खुशी रहने लगी,
    सफर में था थोड़ा सुकून कहीं,
    जो फिर कही खो गया,
    जो मुसाफिर था जिन रास्तों का,
    वो उस रास्ते हो गया,

    गुजर गया फिर सफ़र यूँही,
    रह नहीं गयी कोई सिकायत बाकी,
    सफर का सफर तो कट गया,
    फिर भी रह गयी न जाने कैसी ये उदासी...!!

    ~ गरिमा प्रसाद
    ©imgarima