• banarsi_babu 17w

    सुकून

    कभी-कभी हम लोग के साथ ऐसा भी होता है किसी से पूछ लेते हैं कैसे हो, लोग रोने लग जाते हैं।
    कितनी पीड़ा दर्द दिल में लेकर बैठे हैं बस कोई इतना पूछ ले, कैसे हो रोने लग जाते हैं।
    आप कैसी हो, क्या आप खुश रहते हो!
    क्या आपके दिल में सुकून है!
    क्या आपके मन में शांति है !
    आप अपनी जरूरत की सभी चीजें बाजार से ला सकते हो। पर आप सुकून कहां से लेकर आए, ऐसी कोई दुकान नही जहां सुकून बिकती हो। फिर भी लोग शांति के लिए , सुकून के लिए यहां से वहां भटकते रहते हैं।
    सोचते हैं ,पैसा मिल जाएगा तो सुकून मिल जाएगा। अच्छा जीवनसाथी मिलेगा, तो खुशियां मिल जाएगा। बच्चे हो जाएंगे तो खुशियां आ जाएंगी।
    जिनके बच्चे नहीं है वह भी रो रहे हैं, जिनके हैं वह भी रो रहे हैं। जिनके पास अच्छा जीवन साथी है वह भी रो रहे हैं , जिनके पास नहीं है वह भी रो रहे हैं। जिनके पास धन है वह भी रो रहे हैं, जिनके पास नहीं है वे भी रो रहे।
    जिंदगी में ये मायने नहीं रखता कि आपने कितना जिंदगी जिया, बल्कि आप कितना खुशी से जिए।
    सारा जीवन लोग खुशी , सुकून के लिए भटकते रहते हैं पर हमारे मन को सुकून तब मिलती है जब किसी चीज की पाने की इच्छा छोड़ देते हैं।
    अशांति का कारण मन की इच्छा है मन की इच्छा को काबू में कर लिया जाए ,तो सुकून को हासिल किया जा सकता हैं।