• deepvishu 59w

    चराग़ों का घराना चल रहा है
    हवा से दोस्ताना चल रहा है

    जवानी की हवाएँ चल रही हैं
    बुज़ुर्गों का ख़ज़ाना चल रहा है

    मिरी गुम-गश्तगी पर हँसने वालो
    मिरे पीछे ज़माना चल रहा है

    अभी हम ज़िंदगी से मिल न पाए
    तआ'रुफ़ ग़ाएबाना चल रहा है

    नए किरदार आते जा रहे हैं
    मगर नाटक पुराना चल रहा है

    वही दुनिया वही साँसें वही हम
    वही सब कुछ पुराना चल रहा है

    ज़ियादा क्या तवक़्क़ो हो ग़ज़ल से
    मियाँ बस आब-ओ-दाना चल रहा है

    समुंदर से किसी दिन फिर मिलेंगे