• rangkarmi_anuj 8w

    तुम तसल्ली से जी लो, मैं मुश्किल से मरता हूँ
    मौत बेशकीमती लगती है मुझे, मैं जीने से डरता हूँ

    कितने समंदर देखकर तुम डर से पानी में नहीं उतरे
    मैं तो बग़ावत और ज़लज़ले के समंदर में उतरता हूँ

    यूँही कोई मौजिज़ा नहीं कर गया था मेरी ज़िदंगी पर
    आज भी ज़िंदगी और मौत के बीच मैं तैरता हूँ

    उठाने वाले जीते जी मेरा ज़नाज़ा उठा लें बिना कहे
    मौका जब भी मिलता है मैं भी कफ़न भरता हूँ

    चिराग़ हमेशा बुझाने में लगे रहते हैं वो लोग मेरा
    लेकिन मैं उनके चिराग़ के लिए हमेशा दुआ करता हूँ

    मुझ से नफ़रत कर के क्या मिलेगा ज़माने के इंसानों
    आज कल तुम्हारी नफ़रत को भी मोहब्बत का बरता हूँ
    ©rangkarmi_anuj