• nawikrita_t_rai 45w

    रूबरू थे लेकिन फासले भी
    मुंह मोड दियेऔर रासते भी
    चल रहे  है राही बनकर
    दिल की मंजिले अपने हाथों में लेकर

    वो लकिरें थे जो मिल दिये
    संजोग नहीं तो टूट गये
    न गिले शिक्वे न प्यार रहा
    न वादें बचा पाये न दुवा

    रूबरू थे लेकिन फासले भी
    मुंह मोड दिये है और रासते भी ।

    ©नवीकृता_टी०_राई