• alkatripathi79 8w

    #rachanaprati94
    @loveneetm

    मुझे वो दिन काफ़ी अच्छे से याद है.. हम चारो भाई बहन को एक साथ वायरल बुखार हुआ था... एक दिन तो पापा हमारी देखभाल किए मम्मी रसोई संभाली मगर दूसरे हीं दिन पापा को भी तेज़ बुखार हो गया... घर मानो अस्पताल बन गया था ... माँ अकेली सब संभाले हुए जैसे दस हाथ निकल आए हो कभी किसी को गर्म पानी देती कभी खाना देती कभी पट्टी देती कभी किसी का सर और पैर दबाती... जब हम सो जाते तो बाजार जाती फल,सब्जी, दवा, सब ले कर आती....
    जब भी वो दिन याद आता है सोंच में पड़ जाती हूँ माँ कर कैसे ली सब कुछ? जब की घर में आज जैसी सुविधा भी नहीं थी.....
    इतनी सेवा और इतना देखभाल की हम चारो भाई बहन 5 दिन में स्कूल जाने लायक हो गए थे

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    नारी तो शक्ति है

    लेकिन उसी दिन मम्मी को बुखार हो गया देखते ऐसा लगा मानो कोई पहाड़ टूट पड़ा हो माँ को हम सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी की ”अभी सब बुखार से उठे है और मुझे बुखार हो गया अब मैं इनकी देखभाल ठीक से नहीं की तो सबको कमजोरी हो जाएगी "
    दीदी जबकि बड़ी थी लेकिन माँ उनको कहती तुम अभी रसोई में मत जाओ कमजोरी होगी... और आज भी यकीं नहीं होता सबके मना करने के बाद भी खाना माँ हीं बनाती थी... लेकिन कैसे?
    वो दिन याद आते हीं एक सहज सा मन में जवाब आता है नारी तो शक्ति का रूप होती है वो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है।
    और यही कारण है की आज जब मेरे बच्चे बीमार पड़ते है तो मुझे शक्ति मिलती है, कुछ भी कर जाने की बिना थके बिना सोए।
    ©alkatripathi79