• vidhi90100 11w

    बस आज यूहीं आया एक ख्याल...
    ख्याल अपने आप को बदल देने का..
    ख्याल थोड़ा सा जी लेने का...
    क्यों ना सांस लूं आज खुल कर मैं भी...
    क्यों ना ग़ुरूर करू अपने वज़ूद पर...
    क्यों ना बन जाऊ आज उस तस्वीर मे कैद परिंदे कि भाँती..
    जो आज़ाद हैँ..
    पर जिसे मंज़िल तक का सफर तय नहीं करना...
    जो सुन्दर हैँ...पर उसे अपनी ख़ूबसूरती का आभास नहीं..
    जो जश्न मना रहा हैँ अपने पिंजरे मेँ आज़ादी का...
    वो मासूम हैँ, पर हैँ बेपरवाह..
    क्यों ना बन जाऊ मैं भी आज उस परिंदे कि तरह..
    जो अपने ही आँगन मेँ आज़ाद हैँ..
    आनंदित हैँ.. प्रसन्न हैँ..
    ©vidhi