• amar61090 28w

    रात

    आँशु आँख में चिंता याद में,
    अकेले कमरे में गुमशुम,
    कहा होता हैं कोई औऱ साथ में,
    जीवन के संघर्ष में,
    युवा की हर रात ही बीतती हैं काली रात में

    सब सुना जाते हैं शिक़ायत अपनी,
    कोई कहां समझता हैं उसकी बात,
    एक तरफ़ माँ के आँशु दिखते हैं उसे,
    तो एक तरफ़ आती हैं प्यार की याद,

    पिता का सहारा बन न पाया अभी,
    भाई-बहन का मान न बढ़ाया अभी,
    परिवार के खर्चे में हिस्सेदारी दे न पाया अभी,
    लोग समझतें हैं जिम्म्मेदार वो बन न पाया अभी,

    क़भी रात अकेले कमरे में उसे रोते देखे हो क्या,
    क़भी उसके उदास मन से उसकी ख़्वाहिशें पूछे हो क्या,
    उसे भी चिंता हैं अपने परिवार की,
    उसे भी चाहत हैं अपने प्यार की,
    पर जमाने की नियम में जाने क्यु वो बंधा रहता हैं,
    उसकी मुस्कान नक़ली होतीं हैं यारों,
    वो हमेशा किसी न किसी उलझन में ही फंसा होता हैं।

    वो महफिलों में भी तन्हा पड़ा रहता हैं,
    कितने भी ज़ख्म पड़े हो पीठ पीछे,
    युवा चेहरे से मुस्कुराते खड़ा रहता हैं,
    ©amar61090