• ro_hits 35w



    आवाज़े सिसकती, हालात खिलखिलाते।
    राज-ऐ-दिल हम नही हैं, यूँ ही बताते।।
    बहोत दिल हैं तोड़े, बहोत दिल बिखेरे।
    आज खुद ही हैं टूटे, कदम लड़खड़ाते।।

    बताऊ किसे मैं, किस पे क्या गुजरी।
    लड़कपन था शायद, वो सजा चाहता हूँ।
    वो सदियों से दिल मे दबी दर्द थी जो,
    उसी को गँवा के बस मज़ा चाहता हूँ।।
    ©ro_hits