• goldenwrites_jakir 44w

    #abhivyakti80 घर

    खुली आँखों से अकसर ये दिल इक ख्वाब सुहाना सजाता है
    इक घर हो ये दुनियां हम रंगबिरंगे इस गुलिस्तां के गुलशन के फूल बनकर महकते रहें ,,,,,,,,

    हर तरफ मोहब्बत ही मोहब्बत हो वो आशियाना हम बनाते हैं
    हम इंसानों में इंसानियत का इक फूल खिलाते हैं
    आओ मिलकर इक घर बनाते है ,,,,,,,,,,,,

    जहां ना रहे नफरतो के कांटे जहां ना रहे भेदभाव की लकीरें
    आओ हम सब मिलकर इस सारी दुनियां को इक घर बनाते है
    इक जमीं इक आसमां चाँद सूरज को गवाह बनाते है
    पेड़ पौधे जीव जंतु सब की पनाह में हम खुदा से ये दुआ की अर्जी लगाते हैं
    आओ हम सब मिलकर इक घर इक आशियाना सजाते हैं


    ©goldenwrites_jakir