• pratibhajais 55w

    कोमल सा मेरा मन था,
    उड़ने की चाहते थी हज़ार...
    क्या पता था,
    एक दिन बंजाऊंगी चलती - फिरती खिलौने की दुकान।।

    ©pratibhajais