• prashant_gazal 20w

    बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ
    मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
    1212 1122 1212 22  

    #rachnaprati63 #gunah
    @iamfirebird

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    ग़ज़ल ( गुनाह )

    अमां वो ख़ाक ज़वानी निबाह करते हैं l
    गुनाह जो‌ नहीं करते....गुनाह करते हैं ll

    हरेक बात ज़माने की मानते क्यूँ हो.......
    हज़ार लोग हज़ारों सलाह करते हैं ll

    ज़मीनदार जमीनें हड़प-हड़प करके......
    फ़लक़ के चाँद-सितारों की चाह करते हैं ll

    अदालतों से बरी हो गए सियासतदाँ...
    अजी गुनाह......... कहाँ बे-गुनाह करते हैं ll

    नया है दौर नई और ये रिवायत है........
    किसी से इश्क़, किसी से निकाह करते हैं ll

    गुनाह और यही नेकियाँ मुकद्दर बन...
    कहीं फ़कीर, कहीं बादशाह करते हैं ll

    अभी तो दर्द कई और हैं 'ग़ज़ल' दिल में.....
    अभी से आप कहाँ वाह-वाह करते हैं ll
    ©prashant_gazal