• rahat_samrat 32w

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    दो शब्दों से नजदीकियां दो शब्दों से ही दूरी हो जाती है,
    किसी की उम्मीद अधूरी किसी की आस पूरी हो जाती है।

    महज कुछ वक़्त की ही सजावट होती है उन बातों में ,
    किसी की जुबाँ मिश्री तो किसी की चुभती छूरी हो जाती है।

    बेगुनाही का दौर आया दौड़कर और कहता क्या है सुनिये,
    गुनाहों की सजा में गलतियों की भी मजबूरी हो जाती है।

    पास बैठकर धीरे से कुछ कहने की कोशिश करता है दिल,
    पर सामने देख उसे सहेजी हुई बातें अधूरी हो जाती है।

    परिवार और प्यार का बंधन किसी एक से जुदाई है मालूम,
    हाँ इसलिए बेटी के लिए बेटी की बिदाई जरूरी हो जाती है।

    गिनना आता नहीं मजबूरी को शायद रोटियों का मोल राहत,
    जिनके खातिर पूरे दिन उन मासूमों की मज़दूरी हो जाती है।

    ©rahat_samrat