• dedestined 12w

    Dost

    उसके घर ही बड़ी हुई - लगभग
    उसकी माँ से English grammar revise कर लेती थी
    उसके बड़े भाई ने बैडमिंटन के नियम सिखाए
    उसके घर घी-इडली और छोंक वाली maggi खा लेती थी

    KG 2 में
    मेरा स्कूल बदला था...
    वहाँ रेणु पहले से थी...
    मेरी माँ बताती हैं,
    5 साल की रेणु
    मेरा हाथ पकड़कर बाकियोँ से मिलवाने ले गई थी... मैं शर्मीली थी बचपन में...

    मेरे घर कुछ कलेश था...
    तो अपने घर से कटती थी मैं...
    अंधेरा होने पर ही घर का
    अनमने से रुख़ करती थी

    उसके भाई के तमाम दोस्त उसी के घर आते थे
    प्यासे, बे-दम, क्रिकेट से चूर...
    वो छेड़ती थी मुझे... "गौरव गुप्ता अच्छा लगता है न तुझे? पता है मुझको!"
    किशोरावस्था में शर्मीली नहीं रह गई थी मैं...

    स्कूल से घर लौटते एक्सीडेंट हो गया था मेरा...
    सायकिल कुचल गई थी...
    मुझे लोग उठाकर अस्पताल ले गए थे...
    मेरी माँ को बताते रेणु के ऑंसू ही नहीं थम रहे थे...

    "कुछ-कुछ होता है" का ज़माना था - "फ्रैं~~डशिप बैंड" का ज़माना...
    लेकिन उसने कॉमर्स ले लिया था...
    सेक्शन भी अलग हो गए
    स्कूल भी अलग हो गए

    शहर भी अलग हो गए
    ज़िंदगी भी अलग हो गई

    लेकिन हम अलग नहीं हुए
    हमारी दोस्ती में पिंक ट्विनिंग भी नहीं थी,
    और पिंकी प्रॉमिस भी नहीं,
    और लड़कियों की दोस्ती के बारे में
    कोई गीत भी बॉलीवुड नहीं लिखता

    लेकिन
    सहपाठिनी
    बचपन की साथी
    बड़े होने की सहभागिनी
    हर तजुर्बे की भागीदार
    किसी बैंड, किसी गीत की मोहताज नहीं...

    ©dedestined