• manshigupta 13w

    इश्क

    अगर मैं कहूँ तुम काफी हो
    क्या मुझे इश्क करने की इजाज़त दोगे?
    अगर मैं कहूँ अधुरी हूँ
    क्या मुझे अपने नाम से पुरा करोगे?
    कह दूँ की रातें लम्बी है ,डर है किसी के होने का
    क्या बाहों में भर कर सुला लोगे मुझे?
    या कह दूँ कभी मुझे नफ़रत है खुद से
    तुम्हें पाने की चाहत में मन मुक्त हूँ
    क्या सम्भाल लोगे मुझे?
    कह दूँ कभी मुझे इजाज़त नहीं, तुम्हें प्यार कर सकूं,
    कद्र है तुम्हारे इश्क की मगर डर है की मुकम्मल ना कर सकूं,
    क्या मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर,
    इश्क की इजाज़त तब भी दोगे?
    कब तक रुकी रहूँ तुम्हारे इंतजार में?
    कुछ तो कहों
    डर है कहीं खो ना दूँ खुदको,
    तुम्हें पाने की चाहत में।
    ©manshigupta