• hylzarie 28w

    लोगों को रुख बदलते देखा हैं
    साथ रहने की कसमें खाने वाले
    मैंने उस सख़्श को भी अपने वादो से मुकरते देखा है।।

    दिन के हर पहर बदलते देखा हैं
    अंधेरो से डरने वाले
    मैंने उस सख़्श को भी उजालो से भागते देखा हैं।।

    समय को हाथ से फिसलते देखा हैं
    लोगों को रिश्ते तोड़ते देखा हैं
    मैंने प्यार को नफ़रत मे तब्दील होते देखा हैं।।

    करीब होकर भी सबसे दूर होते देखा हैं
    मैंने अल्फाज़ो को खामोशी मे बदलते देखा हैं
    मैंने खुद को भी इन पहलियों मे उलझते देखा हैं।।
    ©Aashi