• rangkarmi_anuj 62w

    फूली रोटी

    तवे की तपन
    और सुलगती हुई
    आग की उठती हुई
    आंच में पकती
    हुई रोटी,
    और भूखों का
    पेट सब ग्राह्य
    कर लेते हैं,
    उस बूढ़ी की
    ज़िंदगी जो
    रोज स्वाहा करती है
    अपनी उम्र और सांसों
    को,

    यह करती आ रही है
    उस समय से
    जब से उसने
    जन्म लिया और
    जब से उसने जिम्मेदारी को
    घूंघट समझ कर ओढ़
    लिया,
    जिसके एवज में
    उसे मिला पति
    और बच्चे,
    घर के नाम पर
    ससुराल,

    लेकिन उसकी
    खुशी की वजह
    बस एक ही चीज़
    है वो फूली
    पकी रोटी।
    ©rangkarmi_anuj