• parle_g 7w

    जबीं - ललाट , फोरहेड
    अहद-ए-वफ़ा - वादा
    ज़ानिब - कोई दिशा
    दो कौड़ी - बहोत ही जियादा निर्धनता को दर्शाता है !

    @vipin_bahar @bal_ram_pandey @prashant_gazal @iamfirebird @anas_saifi ��

    किसी ने कहा.... की... तुम क्या चाहती हो.... खुदा से.... तो मैंने कहा की...

    गौर से पढ़िये.... यक़ीनन हर शेर... दिल के सम्त से है����

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    ग़ज़ल ( नही लूंगा )

    वज़्न - 2122 2122 2212 1222

    कोई वह'शत में मरूँगा पर यक दुआ नही लूंगा
    मैं किसी यक शख्स की अब कोई हया नही लूंगा

    वो बड़े घर की कोई शह'जा'दी है तो रहे फिर वो
    यार मैं इससे जिया'दा अब ये बला नही लूंगा

    देखो कितना खून टप'का है कल मिरी जबीं से याँ
    मैं कभी इन हा'थों में को'ई आयना नही लूंगा

    तू कभी आया नही मुझको देखने भी याँ ताबिश
    अब मुझे कोई ज'हर दे दो, मैं दवा नही लूंगा

    सोचती है आँधियाँ भी दीपक बुझाने से पहले
    मैं बड़ा ख़ुद-ग़र्ज हूँ, मैं दी'पक नया नही लूंगा

    मुझसे तो फिर इश्क करने की शर्त भी यही है इक़
    मैं तिरी कोई जबाँ फिर अहद-ए-वफ़ा नही लूंगा

    कुछ दिनों पहले ही कोई घर'बार लुटा है उस ज़ा'निब
    अब जमीं पर रह लूंगा उस ज़ा'निब मकाँ नही लूंगा

    ये कलेजा कांप'ता है कोई ग़ज़ल सुनाने में
    रे जिया शा'यर हूँ, दो कौड़ी के सिवा नही लूंगा
    ©parle_g