• rajput_pankaj 17w

    मेरी गुड़िया

    ज़ब वो पैदा हुई तो चारो तरफ,सुनाई देती उसकी किलकारी थी
    अजब थी वो नन्ही सी परी उसकी, उसकी सब ही बातें न्यारी थी
    फुल खिला था जिस आँगन में,वो मेरे घर की ही क्यारी थी
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी

    कुछ समझ ना पाया कोई,इस से पहले ही वो अलविदा कह गयी
    दिल में जो हसरतें थी,वो सारी की सारी दिल में ही रह गयी
    भूल नहीं पाउँगा वो पल वो घड़ियां,जो उसने मेरे साथ गुजारी थी
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी

    माँ के आँचल में छुप कर,उसका वो रोना याद आएगा
    कभी मासूम से चेहरे से,खिलखिला कर हंसना बहुत रुलाएगा
    अजीब सी मासूमियत थी उसमे,उसकी हर झलक सबसे न्यारी थी
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी

    कुछ सपने बाबा के भी टूटे हैं,उसके इस कदर जाने से
    जिसकी सारी थकावट उतार जाया करती थी,बस उसके एक मिठ्ठे मुस्कुराने से
    बाबा नें उसके हर सपने को सजाने की,कर रखी हर तयारी थी
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी

    कश ऐसा हो के फिर से खिल जाये,वही फूल बनके मेरे आँगन में
    खुशियां ही खुशियां भर से आकर,फिर से सब के दामन में
    बहुत ऊँची उड़ान भरने की,कर जिसने रखी हर तयारी थी
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी

    नानी ने भी उसके लिये आँखों में,कुछ सुनहरे ख़ाब सजाये थे
    माँ नें भी कुछ एहसास उसके लिये,अपनें दिल में बसाये थी
    पर आज सबके दिल में,बस उसे एक बार देखने की बेक़रारी है
    बहुत दूर चली गयी आज वो नन्ही परी,जो मुझको जान से भी प्यारी थी
    ©rajput_pankaj