• sourabh_sharma 54w

    कड़वाहट

    धड़क धड़कनो की बंद होने लगी है ,
    चलती फिरती ज़िन्दगी अब सोने लगी है ,
    गैरों की फितरत पे शक क्या करना,
    उम्मीद अपनों से कम होने लगी है ,

    यादें अधूरी , बातें अधूरी ,
    हर पल अधूरा सा रेहने लगा हूँ ,
    गम है , ख़ुशी है , दर्द है , मजा है ,
    एहसास पलों का खोने लगा हूँ ,

    अँधेरे की आदत , डर से मोहब्बत ,
    खुद की तड़प में जीने लगा हूँ ,
    आज हूँ , कल न रहूं ,
    इस ज़हर को पीने लगा हूँ !!!


    ©sourabh_sharma