• theshekharshukla 24w

    एक मतला और दो शे'र, पूरी ग़ज़ल फिर कभी ....

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    ये किस ग़म के मारे हैं सब,
    क्या कुछ अपना हारे हैं सब।

    दुश्मन किसको कहते हो तुम,
    भगवन के तो प्यारे हैं सब।

    जो हारा वो भी, सत्ता में!
    उनके वारे न्यारे हैं सब।
    ©theshekharshukla