• yusuf_meester 9w

    लिखूँगा किसी दिन खुदको तो तुम भी पढ़ लेना
    मिरी बेपरवाह किरदार बेदाग़ दिल पे जड़ लेना

    लहज़ों की अफ़सुर्दगी , बयां करती है ये आँखें
    शिकायतों की गठरी बांध तुम मुझसे लड़ लेना

    मुझे शक़ अब मिरी ही मुहब्बत पे होने लगा है
    कशमकश में हूँ शायद ! मेरा हाथ पकड़ लेना

    ©yusuf_meester