• chahat_samrat 8w



    जिस तरह तुम बिके हो ,उस तरह कोई अमीर नही बिकता
    खिन्न ठीक था,पर अच्छा होता तुम्हारा जमीर नही बिकता

    तुम से ही कहकर तुम्हारा ही रहना था ताउम्र हर अश्क मेरा
    सौंपा तुम्हारे हवाले , तुमसे इन आंखों का नीर नही बिकता

    अब किस जुबान से मै तुम्हे खुदा कहूंगा,थोड़ा ख्याल करते
    जिन पेशेवरों से कतल खातिर, कभी शमशीर नही बिकता

    कटोरा खाली रह जाए तो दुवाएं मोड़ देता है बद्दूवाओ में
    कौन कहता है सब बिक जाएं, मगर फकीर नहीं बिकता
    ©chahat_samrat