• deovrat 5w

    सत्य

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    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    हर बसर यूँ तो जहाँ में ख़ुदही में मसरूफ़ हैं।
    बारे-ग़म है ऐश-ओ-इशरत मुब्तला यहाँ रूह है।
    ग़र मिले जो कोई साथी साथ ले स्वीकार कर।।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    सबकी की मरज़ी से चलेगा चाँद तारों का निज़ाम।
    इस भरम को छोड़ कर बस उन्स का हो एहतमाम।।
    मन की आँखें खोल अब तो सत्य का दीदार कर।।
    ज्ञान का दीपक जला कर ख़ुद को तू बेदार कर।।

    एक रंगीं ख़्वाब जैसी.... है ये दुनियाँ-ओ-दहर।
    कौन कब होगा ज़ुदा याँ.. है कहाँ किसको ख़बर
    ज्ञान का दीपक जला बस ईश का दीदार कर।।
    सत्य को ले मान "अयन" ख़ुदको ना बेज़ार कर।।

    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।
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    ©deovrat "अयन" 24.10.2021
    बेदार=जागरूक, बारे-ग़म=दुःखों का बोझ
    ऐश-ओ-इशरत=अय्याशी, मुब्तला=आसक्त
    उन्स=प्यार, एहतमाम=व्यवस्था, क़याम=ठिकाना