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    मुझे समंदर नहीं पसंद, जिसकी लहरें पल पल बदलती रहती हैं। मुझे बदलने वाली चीजें नहीं पसंद। मुझे शोर नहीं पसंद और समंदर बहुत शोर करता है। उसके शोर में दिल की आवाज़ कहीं खो सी जाती है। और जहाँ दिल की आवाज़ दबा दी जाए वहाँ ठहरना मानों जिंदगी की नाशुक्री करना। मुझे दरिया नहीं बनना जो अंत में समंदर से जा मिले। मुझे झील पसंद है। झील का पानी कुछ यूँ ठहरा हुआ सा लगता है जैसे लंबे सफर का मुसाफिर मंजिल मिलने पर हमेशा के लिए ठहर गया हो। पुरसुकून हो कर बस वहीं अपनी दुनिया बना कर बस वहीं का होकर रह गया हो। तुम मेरी जिंदगी का वही ठहराव हो। जहाँ सुकून है।जहाँ झील की रुमानियत है। बदलते लहरों के खौफ नहीं। मुझे भी झील की पानी की तरह बस तुम पर ठहर जाना है। यहीं अपनी दुनिया बनानी है।
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